“क्यूँ नहीं महसूस होती उसे मेरी तकलीफ,
जो कहते थे बहुत अच्छे से जानते है तुझे।”
एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास,
वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।
" फर्क ये है कि मैं आँखों में काजल नहीं लगाता,शायद इसलिए मैं आँखों से झूठ नहीं बोल पाता l"
चलो मत छोड़ना ये डोर .
थामे रहना यूँ ही,
मैं इंतजार कर लूँगी……
एक जन्म तन्हा और सही….!!
तुम्हें अपने आँगन के पेड़ की,याद नहीं आती..खिड़की पे जो मिलती थी नज़र,वो एहसास आँखों में नहीं आती l
हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ ;
हर याद पे दिल का दर्द ताज़ा हुआ .!