"रो देती है हर बार जब आँगन से जुदा होती है,बेटियांँ एक बार नहीं कई बार विदा होती है।।"
"एक बटन के फासले पे ज़िंदगी थी,किसी से पहले पर दबाया ना गया lमिट जाते सारे दिलों के फासले 'जाना',इश्क़ में अहं को भुलाया ना गया l"
उसकी कश्ती डूब गयी समंदर में कहीं,माँझी जो बच गया बदनाम सारे जहाँ में हो गया...!
ऐसे उसका ख़त कई बार पढ़ता हूँ,जैसे मैं इश्क़ की गली से गुजरता हूँ lहर बार रुकता हूँ उसी शब्द पे,जो बताता की, मैं उसके दिल में रहता हूँ l
मेरी चिल्लाने की आवाज़ मैं खुद नही सुन पाया,नज़र में ये था की नाटक ना समझ ले l
खोज के बाहर तुमको,
हार गया हूँ मैं,
झाँका जब मन भीतर,
वंही बैठी थी तुम l