पता नहीं कितना अंधकार था मुझमें,मैं सारी उम्र चमकने की कोशिश में बीत गया ।
मुट्ठी भर ख़्वाब मेरा,खुला पूरा आसमान तेरा lमैं चाँद तेरा हो सकता नहीं,तू बादल बन बरस सकता नहीं l
Na Samet Sakoge Qayamat Tak Jise Tum,
Kasam Tumhari Tumhein Itni Mohabbat Karte Hain.
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……
सुना है, खुदा के दरबार से कुछ फ़रिश्ते फरार हो गए,
कुछ तो वापस चले गए, और कुछ हमारे यार हो गए
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..