पिता हारकर बाज़ी हमेशा मुस्कुराया,
शतरंज की उस जीत को मैं अब समझ पाया.
सब कुछ मिला है हमको,
फिर भी सबर नहीं है...
बरसों की सोचते है,
पल की खबर नहीं है...!!
मदद करना सीखिये
फायदे के बगैर
मिलना जुलना सीखिये
मतलब के बगैर
जिन्दगी जीना सीखिये
दिखावे के बगैर
और
मुस्कुराना सीखिये
सेल्फी के बगैर!
Kuch Log
Keemat Se Nahi
Kismat Se Milte Hai.