नए सप्ताह में नए दिन की शुरुआत करते है ,मिलते है किसी मोड़ पर फिर नई बात करते है l
बड़ी मासूम सी लगती है,ये कार्तिक की भोर lलगता है ओढे आई एक चादर,मन लगता नाचे जैसे मोर l
वक़्त मिले तो मेरे घर तक चले आना कभी,तेरी खुश्बू के मोहताज़ मेरे गुलदस्ते आज भी हैं.
कभी गुस्से में मुझे वो बहुत डाँटती है,ऐसा प्यार वो सबको नहीं बाँटती है l
सज रही हैं खुशियों की महफ़िल,
सज रहे समाज हैं हो ये खुशहाल.
सलामत रहे आपकी पूरी जिंदगी,
मुबारक हो नया साल।
खुदा से क्या मांगू तुम्हारे वास्ते,
सदा खुशियाँ हो तुम्हारे रास्ते,
हंसी तुम्हारे चेहरे पर रहे कुछ इस तरह,
खुशबू फूल का साथ निभाए जिस तरह ! क्रिसमस की बधाईयाँ 2020-2021