" फर्क ये है कि मैं आँखों में काजल नहीं लगाता,शायद इसलिए मैं आँखों से झूठ नहीं बोल पाता l"
फिर उसी बेवफा पे मरते हैं,फिर वही ज़िन्दगी हमारी है ।
नज़र में उसकी नज़र छोड़ आया,बंद ख़्वाबों को सहर तक छोड़ आया lपलक खुलती तो ना जाने क्या होता,जाने कहाँ मैं ये मन छोड़ आया l
मेरी चिल्लाने की आवाज़ मैं खुद नही सुन पाया,नज़र में ये था की नाटक ना समझ ले l
Pyar Bhari shayari