इश्क के नशे में इतना चूर हो गए हम,
पता ही नही चला कि मजबूर हो गए हम।
"मोह्हबत है इसलिए शायद,ये बात भी भूल जाता हूँ,जब चाँद मेरे पास नहीं होतातो कंही और निकलता है l"
कई कारवाँ हो लिए उसकी तरफ,अब शायद मैं उसकी नज़र में नहीं..
"होती हो ओझल नज़रों से,
ढूंढ़ती है आँखे तुम्हें,
जैसे खोजता कोई शहर-शहर,
ऑक्सीजन सैलेंडर है l"