गलतफहमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मोहब्बत में,
जहाँ किरदार हल्का हो कहानी डूब जाती है।
वो बात -बात पे नराज़ हो जाते है,
और इधर बात करने का वक़्त नहीं l
"कभी-कभी पूछ लेती है, हाल मेरा,कभी मिलूं तो पूछूं, जो है सवाल मेरा l"
"बड़ी तेजी से इंसान -इंसान को भूल रहा था,
ये ठोकर भी जरुरी था,थोड़ा ब्रेक लगाने को l"