किसी और के पास कम से कम आबाद तो होगाहमारे पास कुछ था भी तो नहीं सिवाय बेबसी के
किसी और के पास कम से कम आबाद तो होगा
हमारे पास कुछ था भी तो नहीं सिवाय बेबसी के
कुछ तुम को भी है अज़ीज़ अपने सभी उसूल,कुछ हम भी इत्तफाक से ज़िद के मरीज़ है
"कभी मेरे जाने पे लड़ती है वोकभी खुद तन्हा छोड़ जाती है,
"अपने गलतियों पे झुक के माफ़ी माँग लेना,
अपने अहम से जादा रिश्तों को मोल देना,
वैसे तो हमें बार -बार लौट आने की आदत है,
पर मेरी मोह्हबत को कमजोरी ना जान लेना l"
ये ज़िन्दगी तेरी यादो से,
अब नासूर सी चुभती है,
किसे पता था मेरी दोस्त,
ये यादे ताज महल से बड़ी लगती है!
उसने पूछा सबसे ज्यादा क्या पसंद है तुम्हे
मैं बहुत देर तक देखता रहा उसे
बस ये सोचकर कि
खुद जवाब होकर उसने सवाल क्यूँ किया…!!