बातें मेरी उन्हें समझ नहीं आती,हर बात, बातों में समझाई नहीं जाती lआँखें बंद कर क्यों नहीं सुनती दिल की,दिल की बातों में दिमाग़ लगाई नहीं जाती l
तुम थी,तो कम थी,ना हो, तो भरपूर हो,पता चले की तुम हो मुझमें,इसलिए,ये मौसम जरूर हो l
"अगले पल ज़िंदगी ना जाने,कौन सा रंग दिखायेगी lहम है,रोज नये सपने खरीदते है,ना जाने वो,कैसे फ्रेम में आएगी l"
"क्या कहा, क्या समझा गया,क्या समझा, क्या कहा गया,मोह्हबत घूमती इन किनारों पे,जो कहा गया, ना कभी समझा गया l"
"उम्मीद कम पर सपने बड़े रखना,दूसरों से कम, खुद से रोज कहना,एक गुजारिश तो,सबकी पूरी होगी,नज़र लक्ष्य पे, आँखें खुली रखना l"
उन्हें शिकायत है कि,हम उन्हें इतना क्यों सोचते है,क्या गुजरेगी जान के, हम उन्हें हर लम्हें में जीते है l