सुबह की चाय,घर की बालकनीतुम्हारे य़ादों का साथ खास है lयही सिलसिला है रोज का ,तुमसे ही चाय की मिठास है l
कुछ बातें इतनी गंभीर होती है,कि वो केवल मजाक में ही कि जा सकती है
किसी बहाने पास मेरे रुक जाना,ख्वाब में भी मुझ से दूर ना जाना,बात तेरे जाने की रुला गई मुझे,मरने से पहले मुझको मार ना जाना l
"ना खुश होता हूँ, ना उदास होता हूँ,तुम नहीं होती, पर तेरे पास होता हूँ,पागलों सा भागता हूँ,तलाश में खुद के,बताता नहीं हूँ पर, इंतज़ार में होता हूँ l"
"बैठे-बैठे एक मुस्कुराहट,ओंठो पे आ गई,कोई बात तुम्हारी प्यारी, जहन में आ गई,लोगो ने पूछा क्या है, क्यों हँस रहे हो,उन्हें क्या बताता, तुम कैसे पागल बना गई l"
हक़ से अगर दे दो,
नफरत भी कबूल है हमे,
खैरात में तो हम…
तुम्हारी महोब्बत भी न ले.