खुद ही रोए और खुद ही चुप हो गए,ये सोचकर की कोई अपना होता तो रोने ना देता!!
" बहुत खुश चेहरे के पीछे,अक्सर उदास आँखें होती है l "
मन करता हैएक लंबी, अकेली यात्रा पर निकल जाऊँ।तब याद आता है इतने बरसों से उसी यात्रा में हूँ ।
कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
तुमसे मिलके होते होंगे,कितने पूरे,मैं तुमसे मिलकर दुगना हो गया lएक जहान का होता था पहले,अब दो जहान का हो गया l
दिल-ए-आबाद का बर्बाद भी होना ज़रूरी है
जिसे पाना ज़रूरी है उसे खोना ज़रूरी है