आने में जो तुम देर लगाती हो ,कहाँ सितारों में खो जाती हो lमेरे कल की गलती का बदला तो नहीं,मुझे सताने को देर तक रास्ते में रह जाती हो l
तेरे रुखसार पर ढले हैं मेरी शाम के किस्से,खामोशी से माँगी हुई मोहब्बत की दुआ हो तुम।
कितना रोया था मैं तेरी खातिर
अब सोचता हूँ तो हंसी आती है ..
"मुह पर जो लोग हमारी वाह वाह करते हैं llपीठ के पीछे वही लोग हाय हाय करते हैं ll"
औऱ फ़िर बिछड़ कर ये तो होना ही था ।अब समन्दर जितनी प्यास लिए फ़िरते हैं दोनों ।।
माँ की सी मुझे नज़र दे ऐ खुदाकि ज़माना मुझे फिर बुरा न लगे।