जो दिखा तुम्हारी आँखों में अश्क ,ये दर्द थोड़ा जादा बढ़ गया lहो गया फिर से तुमसे इश्क ,ये दिल फिर से नया हो गया l
तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
"इतवार को मिले फुर्सत,तुमसे मिलने की हसरत,ये दो ख़्वाब है जो,रोज मैं देखता हूँ l"
जाने कैसे मिलता है वो मुझे,फिर वापस नहीं जाता,समंदर में पानी बहुत है पर,समंदर का पानी पीया नहीं जाता l
लेके चले थे तूफान ठोकरों का डर ना था
संग था कारवां बिछड़ने का गम ना था
अर्ज़ी थी साथ रहने की उम्र भर लेकिन मिलने का वक़्त ना था
कोशिश तो बोहत की मगर नज़रें मिलाने का दम ना था
हँसकर हर दुःख छिपाने की,
आदत है बड़ी मशहूर मेरी ,
लेकिन कोई हुनर काम नहीं आता,
जब इन होंठो पर किसी ख़ास का नाम आता है।