अमीरों ने बनाई ऐसी दवाई,
जो चुरा लेती है मेरे मेहनत की सारी कमाई.
पहली मोहब्बत थी और हम दोनों ही बेबस,वो ज़ुल्फ़ें सँभालते रहे और मैं खुद को।
चार दीवारों के अलावा भी,घर में कुछ होता है,दो बाहें होती है औरएक दिल होता है...
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
है प्यार नाम जिसका, एक ऐसी है क़ैद दोस्तों,
ज़िन्दगी बीत जाती है पर सज़ा ख़त्म नहीं होती |