मै उसको चाँद कह दू ये मुमकिन तो है,मगर… लोग उसे रात भर देखें ये मुझे गवारा नहीं
रूठे तो इक लफ्ज़ नहीं कहती है मुंह सेबस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है..
ये बैचनी जो मेरे घर आई है,ना जाने कौनसा दर्द साथ लाई है lक्यों नज़र को, नज़र की तालाश है,क्या ये काँटों से भरा गुलाब है,या दूर कुसुमित फूल पलाश है l
मेरे सपनों को तोड़ने को,नींद मुझसे लड़ती रही lमुझे भी जिद थी, जितने की,मैं एक पल भी सोया नहीं l
हजारों से करूं इश्क़,ये फितरत नहीं हमारी,पर तुमसे इश्क़ मैं, हजारों बार कर जाऊँगा l
खिलखिलाती सुबह है, है ताजगी भरा सवेरा
फूलों और बहारों ने, है रंग अपना बिखेरा
बस इंतज़ार है आपकी एक मुस्कराहट का
जिसके बिना… ये दिन है अधूरा!
Good Morning My Love.