पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैंज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं
मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर मेंमगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं
बड़ी ख़ामोशी से गुज़र जाते हैं हम एक दूसरे के करीब से..फिर भी दिलों का शोर सुनाई दे ही जाता है…!!
Kabhi udaas ho jayo
to btana tumhay
fir se apna dil denge
tumhe khelne k liye
अगर तुम अपने पापा की “परी”हो, तो हम भी अपने बाप के “नवाब” है !