रंजिशे नफ़रतें मिट जाये सदा के लिए
तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है ,
ए दोस्तों.....
लेकिन पूरी उसकी ही होती है जो तक़दीर लेकर आता है .
बड़े प्यार से तराशा था उस संगेमरमर कोबड़ा नाज़ था उसे अपने आप पर.एक दरार क्या पड़ीकिसीने मुड़ कर देखना तक गंवारा न समझा.
मिलने का वादा कर गयी थी,
वापस लौट आउंगी ये कहकर गयी थी,
आई है अब वो जनाज़े पे मेरे,
वादा वो अपना निभाने चली थी!!
जब भी सोचूं तुझे, दर्द अपना बड़ा लेता हूँ |
फिर हर साल का नया सूरज देख कर मुस्कुरा लेता हूँ |
नया साल मुबारक हो |