काश इक दिन ऐसा भी आये हम तेरी बाहों में समा जाएँ,
सिर्फ हम हो और तुम हो और वक्त ही ठहर जाए।
एहसान करो तो दुआओ में मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर
इतनी ख़ामोशी क्यों ….?
बस इतना ही तो पूछा था-
“कभी वफ़ा की किसी से…
तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।
वफा क्या होती है?
काश तुम जान जाती ...
ना हम, ना तुम अकेली होती ।
खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही,
मेरे न सही… किसी के दिल में बसे तो सही।