तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।
मैं चंद्रमुखीतू सूरजमुखीमैं तुझसे दुखीतू मुझसे दुखीएक काम कर दे बिल्डिंग से कूदकर मरजा तू भी सुखी मैं भी सुखी |
तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर,जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।
ऐ बेदर्द… सब आ जातें हैं यूँ ही मेरी ‘ख़ैरियत’ पूछने…अगर तुम भी पूछ लो तो यह ‘नौबत’ ही न आए.