कुछ लम्हे और उसका साथ चाहता था,
आँखों में थमी वो बरसात चाहता था !!
जानता हु बहुत चाहती थी वो,
मगर उसकी जुबान से 1 बार इज़हार चाहता था...!!
मैं तेरे हिज़ार की बरसात में कब तक भीगू!!ऐसे मौसम में तो दीवारे भी गिर जाती है..
बैंक मैनेजर: ये क्या अजीब सा हस्ताक्षर है?“@/e”संता: ये हस्ताक्षर मेरी दादी के हैं!बैंक मैनेजर: ऐसा अजीब सा हस्ताक्षर? क्या नाम है उनका?संता: जलेबी बाई…
मेरे-तेरे इश्क़ की छाँव में… जल-जलकर!
काला ना पड़ जाऊ कहीं !
तू मुझे हुस्न की धुप का
एक टुकड़ा दे…!
मैंने तेरा नाम लेकर
ही सारे काम किये है
माँ,
और लोग समझते है
कि, बंदा बहुत किस्मत वाला है ।