इंसान को हमेशा मृदु भाषी लोगों ही कष्ट पहुंचते हैं,
क्योंकि सत्य और कड़वा बोलने वालों को तो खुद ही हम दूर कर देते हैं.
उम्मीद ऐसी हो जो मंजिल तक ले जाये,
मंजिल ऐसी ही जो जीना सिखलाये,
जीना ऐसा हो जो रिश्तों की कदर करे,
रिश्ते ऐसे हों जो याद करने को मजबूर करें।
चलो ज़िन्दगी को जिंदादिली से जीने के लिए एक छोटा सा उसूल बनाते हैं,
रोज़ कुछ अच्छा याद रखते हैं, और कुछ बुरा भूल जाते हैं।
आकाश से ऊँचा कौन – पिता
धरती से बड़ा कौन – माता
एक रोस उनके लिएजो मिलते नही रोज़-रोज़,मगर याद आते है हर रोज़ |