ननिहाल की एक बात बहुत अच्छी लगती है,
वहाँ लोग हमें हमारी माँ के नाम से पहचानते है
अच्छाई और बुराई दोनों हमारे अंदर हैं
जिसका अधिक प्रयोग करोगे वो उभरती व निखरती जायगी
कितने मूर्ख हैं
हम भगवान के बनाए फलों को भगवान को ही अर्पण करके धन दौलत माँगने लगते हैं
हमसफ़र खूबसूरत नहीं
बल्कि सच्चा होना चाहिए
इश्क ने तेरी जिंदगी से मेरी पहचान कराई है
प्यार ही जिंदगी है यह बात मुझे समझाई है
बस कभी बुझे ना ये समां मोहब्बत की सनम
जो मैंने तेरे और तूने मेरे दिल में जलाई है