ननिहाल की एक बात बहुत अच्छी लगती है,
वहाँ लोग हमें हमारी माँ के नाम से पहचानते है
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए|
संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती
और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती
जिनका कद ऊँचा होता है
वो दूसरों से झुक कर ही बात करते हैं
जीवन में किसी को रूलाकरहवन भी करवाओगे तो कोई फायदा नहींऔरअगर रोज किसी एक आदमी को भी हंसा दियातो आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरूरत नहीं!