ननिहाल की एक बात बहुत अच्छी लगती है,
वहाँ लोग हमें हमारी माँ के नाम से पहचानते है
ईश्वर हर जगह नहीं हो सकते
इसलिए उन्होंने माँ को बनाया
ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा,
सियासत अपनी चालों से कब तक किसान को छलता रहेगा.
जीवन की वास्तविकता बस इतनी सी है
बचपन मे होम वर्क जवानी मे होम लोन और बुढापे में होम अलोन
ही रह जाता है...
सुप्रभात!
अपनी छवि का ध्यान रखें
क्यूंकि इसकी आयु आपकी आयु से कहीं ज्यादा होती है