भोले तेरे भी शौक निराले है ,
कही चिलम , कही गांजा , कहीं विष के प्याले है |
एक दुआ मंगाते हैं हम अपने भगवान् से,
चाहते हैं आपकी ख़ुशी पुरे ईमान से,
सब हसरतें पूरी हो आपकी,
और आप मुस्कुराएँ दिलों जान से।
खुद की पर्वा किए बिना दिन रात अन्न उपजाता है, सलाम है इस धरती माँ के पुत्र को जिसके कारण हमारा जीवन मुस्काता है।
छत टपकती हैं, .. उसके कच्चे घर की……
फिर भी वो किसान करता हैं दुआ बारिश की..
क्रोध हवा का वह झोंका है
जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है
रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हें
तोड़ना मत क्योंकि पानी चाहे
कतना भी गंदा हो अगर
प्यास नहीं बुझा सकता
पर आग तो बुझा सकता है
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की