आजकल हम इंसान
उस दौर में जी रहे है
जहां मासूमियत को
बेवकूफी कहा जाता है
उम्मीद ऐसी हो जो मंजिल तक ले जाये,
मंजिल ऐसी ही जो जीना सिखलाये,
जीना ऐसा हो जो रिश्तों की कदर करे,
रिश्ते ऐसे हों जो याद करने को मजबूर करें।
दांतों को आराम देकर देखिए आपका स्वास्थ्य सुधर जाएगा
जिव्हा पर विराम लगा कर देखिए आपका क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा
बारिश की बूँदें भले ही छोटी हों..
लेकिन उनका लगातार बरसना
बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है…
वैसे ही हमारे छोटे छोटे प्रयास भी
जिंदगी में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं…
हो सकता है हर दिन अच्छा ना हो,
लेकिन हर दिने में कुछ न कुछ अच्छा होता है।
आपका दिन शुभ हो।