जानते हो मोहब्बत किसे कहते है
किसी को दिल से चाहना
उसे हर जाना
और फिर खामोश रहना..!!
इंसानी जिस्म में सैंकड़ों हैवान देखे हैं,
मैंने दिल में रंजिश रख महफ़िल में आये मेहमान देखे हैं|”
खो गयी है मंजिले, मिट गए है सारे रस्ते,
सिर्फ गर्दिशे ही गर्दिशे, अब है मेरे वास्ते.
काश उसे चाहने का अरमान न होता,
मैं होश में रहते हुए अनजान न होता
न प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान न होता.
अब कभी हम ना मिलेंगेएक बार जुदा होने के बादअब बता देना मुश्किलों को भीनया घर तलाश कर लोसारी मुश्किलें ख़त्म हो जाएँगीतुझसे बिछड़ने के बाद
उनका भी कभी हम दीदार करते है,उनसे भी कभी हम प्यार करते है,क्या करे जो उनको हमारी जरुरत न थी,पर फिर भी हम उनका इंतज़ार करते है..!!