उसी का शहर, वही मुद्दई, वही मुंसिफ
हमीं यकीन था, हमारा कुसूर निकलेगा
यकीन न आये तो एक बार पूछ कर देखो
जो हंस रहा है वोह ज़ख्मों से चूर निकलेगा
“इन हसीनो से तो कफ़न अच्छा है,
जो मरते दम तक साथ जाता है,
ये तो जिंदा लोगो से मुह मोड़ लेती हैं,
कफ़न तो मुर्दों से भी लिपट जाता है.”
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संता और बंता दोनों भाई एक
ही क्लास में पढ़ते थे।
अध्यापिका: तुम दोनों ने अपने पापा का नाम अलग-अलग क्यों लिखा?
संता: मैडम फिर आप कहोगे नक़ल मारी है, इसीलिए।
😃😛😛😛😂😂😂😆😆😆
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे,
मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।