खुदा करे हर साल चाँद बन कर आए
दिन का उजाला शान बन के आए
कभी ना दूर हो आपके चेहरे से हंसी
ये होली का त्यौहार ऐसा मेहमान बन के आए
इश्क की शुरुआत निगाहों से होती है
सजा की शुरुआत गुनाहों से होती है
कहते हैं इश्क भी एक गुनाह है
जिसकी शुरुआत दो बेगुनाहों से होती है
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे,
मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।
विद्या के अलंकार से अलंकृत होने पर भी दुर्जन से दूर ही रहना चाहिए,
क्योंकि मणि से भूषित होने पर भी क्या सर्प भयंकर नहीं होता
संकट के समय धैर्य धारण करना
मानो आधी लड़ाई जीत लेना है