Ab chhod diya hai
ishq ka school hamne bhi,
Humse ab mohabbat ki
fees ada nahi hoti !
ख़ुशियों की ख़ातिर हमने कितने क़र्ज़ उतार रक्खे हैं
ज़िंदगी फिर भी तूने हमपे कितने दर्द उतार रक्खे हैं
मासूम अगर होता तो सब मिलके लूट लेते
जाने किस अपने ने मेरे दुश्मन उतार रक्खे हैं
किसी ने मुझे कहा की तुम हर रोज,
सुबह सुप्रभात करके सबको याद करते हो,
तो क्या वो भी तुम्हे याद करते है मेंने कहा,
मुझे रिश्ता निभाना है मुकाबला नहीं करना!
Good Morning
कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत....मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना......
तेरे सिवा कौन समा सकता है मेरे दिल में……रूह भी गिरवी रख दी है मैंने तेरी चाहत में !!