वो छोड़ के गए हमें,न जाने उनकी क्या मजबूरी थी,खुदा ने कहा इसमें उनका कोई कसूर नहीं,ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी..
वो दिल ही क्या जो तुझसे मिलने की दुआ न करे,
ए सनम.......
में तुझको भूल कर जिन्दा रह सकूं ऐसा रब्ब न करे.
हसीना से मिलें नजरें अट्रैक्शन हो भी सकता है,
चढ़े फीवर मोहब्बत का तो एक्शन हो भी सकता है,
हसीनों को मुसीबत तुम समझ कर दूर ही रहना,
ये अंग्रेजी दवाएं हैं रिएक्शन हो भी सकता है।
“नही है हमारा हाल,
कुछ तुम्हारे हाल से अलग,
बस फ़र्क है इतना,
कि तुम याद करते हो,
और हम भूल नही पाते.”
बेवफाओं की दुनिया से लफ्जों को आज भी शिकायत है......जान बूझ कर इस्तेमाल नहीं करते, फिर लगाते तोहमत है . ! !