तेरी यादों की खुशबू से हम महकते रहते हैं,
जब जब तुझको सोचते हैं हम बहकते रहते हैं…
जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहा
भोली सी अदा कोई फिर इश्क की जिद पर है,फिर आग का दरिया है और डूब के जाना है।
जब भी जाता हूँ कहने,जुबाँ कुछ कँहा बोल पाता है lबस रहती है नज़र में नज़र,कहना-सुनना तो यूँ ही हो जाता है l
"खुशी में,महीनों की दूरी भी सह जाते है,नाराजगीं में, एक पल भी ना काट पाते है l"