ये जो खामोश से अलफ़ाज़ लिखे है न,पड़ना कभी ध्यान से चीखते कमाल है।
ये जो खामोश से अलफ़ाज़ लिखे है न,
पड़ना कभी ध्यान से चीखते कमाल है।
मेरी आवाज़ ही परदा है मेरे चेहरे का,
मैं हूँ ख़ामोश जहाँ, मुझको वहाँ से सुनिए।
किसी को क्या बताये की
कितने मजबूर है हम..!!
चाहा था सिर्फ एक तुमको और
अब तुम से ही दूर है हम..!!
Aisa lagta hain kuchh hone ja raha hain..
Good Night Shayari