ये जो खामोश से अलफ़ाज़ लिखे है न,पड़ना कभी ध्यान से चीखते कमाल है।
ये जो खामोश से अलफ़ाज़ लिखे है न,
पड़ना कभी ध्यान से चीखते कमाल है।
काश तकदीर भी होती किसी जुल्फ की तरह…
जब जब बिखरती संवार लेते…
तेरी साँसों में बिखर जाऊं तो अच्छा है,
बन के रूह तेरे जिस्म मे उतार जाऊं तो अच्छा है,
किसी रात तेरी गोद में सर रख कर सो जाऊं,
उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है
माँ ने कहा था कभी किसीका दिल मत तोडना,,इसलिए हमने दिल को छोड के बाक़ी सब तोड़ा !!
अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है,हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना।