खुदा करे वो मोहब्बत जो तेरे नाम से है,हजार साल गुजरने पे भी जवान ही रहे।
रूठे तो इक लफ्ज़ नहीं कहती है मुंह सेबस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है..
ये बैचनी जो मेरे घर आई है,ना जाने कौनसा दर्द साथ लाई है lक्यों नज़र को, नज़र की तालाश है,क्या ये काँटों से भरा गुलाब है,या दूर कुसुमित फूल पलाश है l
"तुम रोज थोड़ा मिलना,
बहुत बाकी रह जाना,
तुम्हें खोजते-खोजते,
एक दिन खुद को पा लूँगा l"
Good Morning Shayari
तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ ले आए हो…
दोस्त
ये सिक्का तो बरसों से नहीं चलता…!!