मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
"मैंने खुद को,उसमें खो दिया,फिर मैंने उसे खो दिया l"
"कोई गीत ओंठो पे, ठहर जाती है,फिर तेरी याद बहुत आती है,तेरे हाथो के तरफ, मेरे हाथो का सफऱ,अधूरी है, देखो!पूरी ही नहीं हो पाती है l"
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख,
मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख…!
वो दिल ही क्या जो वफ़ा ना करे,
तुझे भूल कर जिएं कभी खुदा ना करे,
रहेगी तेरी दोस्ती मेरी जिंदगी बन कर,
वो बात और है, अगर जिंदगी वफ़ा ना करे