इस कदर तुझ से प्यार हुआ,की हम बन बैठे आशिकतुम ही बता दो ए बेवफा,क्या कमी थी मेरे प्यार में आखिर….
इस कदर तुझ से प्यार हुआ,
की हम बन बैठे आशिक
तुम ही बता दो ए बेवफा,
क्या कमी थी मेरे प्यार में आखिर….
कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,
कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।
सब कुछ झूठ है
लेकिन फिर भी बिलकुल सच्चा लगता है…
जानबूझकर धोखा खाना कितना अच्छा लगता है
एक छुपी हुई पहचान रखता हूँ,
बाहर शांत हूँ, अंदर तूफान रखता हूँ,
रख के तराजू में अपने दोस्त की खुशियाँ,
दूसरे पलड़े में मैं अपनी जान रखता हूँ।
Bin tere mujko Zindagi se khauff lagta hai
Kisto Kisto mein marr raha hu aisa roz lagta hai…