काश कहीं से मिल जाते वो अल्फाज हमें भी जो तुझे…
बता सकते कि हम शायर कम तेरे दीवाने ज्यादा हैं…
कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है
कृषि कानूनों को इतना बेहतर बनाएं,
कि सड़कों पर कभी गरीब किसान न आएं.