जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।
जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,
अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।
पास जब हम बहुत थे तो बहुत दूर थे,दूर थे जब हम तो बस मजबूर थे।जाने किसकी वजह से ये रिश्ता था टूटा,तुम भी बेकसूर थे और हम भी बेकसूर थे।।
पास जब हम बहुत थे तो बहुत दूर थे,
दूर थे जब हम तो बस मजबूर थे।
जाने किसकी वजह से ये रिश्ता था टूटा,
तुम भी बेकसूर थे और हम भी बेकसूर थे।।
वो गई कुछ इस तरह,छोड़ के,इंतज़ार करता रहा, हर मोड़ पे l