एक पागल आइने में खुद को देख
कर सोचने लगा यार इसको कहीं देखा हूँ।
काफी देर टेंसन में सोचते सोचते-----
धत्त तेरी की ये तो वही है
जो उस दिन मेरे साथ बाल कटवा रहा था
जादू हैं उसकी हर एक बात में,
याद बहुत आती है दिन और रात में,
कल जब देखा था मेने सपना रात में,
तब भी उसका ही हाथ था मेरे हाथ में
“लोग क्या कहेंगे”- ये बात इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती
ज़िन्दगी दो दिन की है,
एक दिन आपके हक़ में, एक दिन आपके खिलाफ,
जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना,
और जिस दिन खिलाफ हो, थोडा सा सब्र ज़रूर करना।
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे,
मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।