चुप-चाप से रहते हैं वो अक्सर,
ज़ुल्फ़ें भी सुना है कि संवारा नहीं करते,
दिन रात गुजरते हैं उनके बेचैन से,
तो चैन से हम भी गुजारा नहीं करते।
मैं किताब बन जाऊं तुम स्याही बन जाना,
मुझ अधूरी कहानी को तुम पूरी कर जाना...
रात को दिन, दिन को रात,
सुबह को शाम समझ बैठा हूं,
कुछ भी खोया हूं तेरे प्यार में,
मेरी जान तेरे नाम कर बैठा हूं 😋
नफ़रत नहीं है तुमसे,
लेकिन अब प्यार भी नहीं है,
बिछड़ने का ग़म तो है,
लेकिन अब मिलने की चाहत भी नहीं है।
दुनियाँ की सबसे
अच्छी किताब हम स्वयं हैं
खुद को पढ़ने की कोशिश कीजिए
सब समस्याओं का समाधान मिल जाएगा...
मोहब्बत में हम उन्हें भी हारे है,
जो कहते थे हम सिर्फ तुम्हारे है।