“किसी न किसी को किसी पर एतवार हो जाता है,
एक अजनबी सा चेहरा भी यार हो जाता है,
खूबियों से ही नही होती मोहब्बत हमेशा,
किसी की कमियों से भी कभी प्यार हो जाता है !
आरज़ू के दीए दिल में जलते रहेंगे,
मेरी आँखों से आंसू निकलते रहेंगे,
दिल में रौशनी तो करो तुम शमा बन के,
मोम बनकर हम यूं ही पिघलते रहेंगे।
कुछ हदें हैं मेरी कुछ हदें हैं तेरी..!!
लेकिन दायरों में भी इश्क़ होता है…!!❤
इश्क के चांद को अपनी पनाह में रहने
दो लबों को ना खोलो आंखों को कुछ कहने दो
कुछ लोग पास होकर भी ,
साथ नहीं देते।
और कुछ लोग दूर रहकर भी,
जीने की वजह बन जाते हैं।
तुम्हें कितनी मोहब्बत है मालूम नहीं,
मुझे लोग आज भी तेरी कसम दे कर मना लेते है।