तुम्हें कितनी मोहब्बत है मालूम नहीं,
मुझे लोग आज भी तेरी कसम दे कर मना लेते है।
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर,
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है…….
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते।
दो मुलाकात क्या हुई हमारी तुम्हारी,निगरानी में सारा शहर लग गया।
प्यार वो एहसास है जो मिटता नहींप्यार वो पर्वत है जो झुकता नहींप्यार की कीमत क्या है हमसे पूछो,प्यार वो अनमोल हिरा है जो बिकता नही
Na Samet Sakoge Qayamat Tak Jise Tum,
Kasam Tumhari Tumhein Itni Mohabbat Karte Hain.