हर लम्हा तेरी याद का पैगाम दे रहा है,
अब तो तेरा इश्क मेरी जान ले रहा है|
मैं ‘गलती’ करूँ तब भी मुझे
‘सीने’ से लगा ले,
कोई’ ऐसा चाहिये, जो मेरा हर
‘नखरा’ उठा ले।
जब तलक एहसासे मोह्हबत,मोहताज़ इज़हारे मोह्हबत की lसमझ अभी सफर बाक़ी है,मंजिल इबादते मोह्हबत की l
सोचते -सोचते गुजरा,मीलों का सफ़र lकब लगी आँखना थी नींद को भी खबर lजागते-जागते यूँ ही,रात गुजर जाती है l
शुभ रात्रि
Pyar Bhari shayari