मैं ‘गलती’ करूँ तब भी मुझे
‘सीने’ से लगा ले,
कोई’ ऐसा चाहिये, जो मेरा हर
‘नखरा’ उठा ले।
जो पास हो जरुरी नहीं साथ हो
जब तलक एहसासे मोह्हबत,मोहताज़ इज़हारे मोह्हबत की lसमझ अभी सफर बाक़ी है,मंजिल इबादते मोह्हबत की l
कुछ आँसुओ कोगिरकर बिखरने का भी अधिकार नही होता,वो तो आँखों मे ही सूख जाते हैं।
कुछ और, और कहो, में वक्त गुजर जाता है,
घंटो का साथ भी,मिनट भर का नज़र आता है l
"स्याह की एक बूँद से,
बदलती है दुनियाँ,
कभी कलम उठा,
आँखों का सच लिख देना l"