पुराने इश्क को आजमाया हमने ,नए इश्क में वक़्त गवाया हमने lजब भी हुआ इश्क ..हर बार नई ताजगी का एहसास पाया हमने l
ओझिल जो हुआ , वो एक पल के लिएभरी महफ़िल में, मैं अकेला हुआ lबात कुछ भी, किसी से हुई,मन तलाशता हर ओर, ऐसा मेला हुआ l
"जो प्रेम मैं तुमसे कर चुका,वैसा किसी से ना कर पाऊँगा,आँखों में भर जाये आँसू,पर मैं रो भी नहीं पाऊँगा l"
"उसके साथ और बाद, उसी को जीया मैंने,इस तरह अपना इश्क़, मुकम्मल किया मैंने l"