काश ! कोई इस रात की शहर रोक लेता ,काश ! आज कोई मुझे अपने घर रोक लेता l
ये जो मीठा सा दर्द,जब तेरी बातों से होता है lमोह्हबत है मेरे अंदर,इसका एहसास होता है l
अब तो इश्क़ भी हम दोनों पर तरस नहीं खाता...अब वो मेरे शहर नहीं आती और मैं उसके शहर नहीं जाता..
माँ की सी मुझे नज़र दे ऐ खुदाकि ज़माना मुझे फिर बुरा न लगे।
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
कब तक उसे सोचूंगा, कब तक गाऊंगा,ये मुमकिन हो,वो मेरी हो जाए तो क्या होगा,उसकी याद में पिघलता हूँ, वैसे ही रात भर,नींद से जागूंगा तो, आगोश में सो जाऊँगा l