"बदल जाते है दिन, नया सवेरा आता है,वो शख्स, ना जाने क्यों साथ चला आता है,खुशियों के कदम तो चले, वो चार थे,ग़म का कारवाँ है देखो, खत्म नहीं हो पाता हैl"
Good Morning Shayari
एहसान करो तो दुआओ में मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर
इतनी ख़ामोशी क्यों ….?
बस इतना ही तो पूछा था-
“कभी वफ़ा की किसी से…
मेरे दोस्तों ने इकट्ठा किया मेरे ही कत्ल का सामान,
मैंने उनसे कहा,
यारो तुम्हारी नफरत ही काफी थी मुझे मारने के लिए……
तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत …….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत….
Yaad rahega ye dour- E hayaat humko
Ki tarse the zindgi me zindgi ke liye