ये गरजते बादल,ये बिन मौसम की बारिश, लगता है
अब जनवरी को भी दर्द हो रहा है दिसम्बर के जाने का
उसने सही कहा था मैं आदत हूँ उसकी,
और आदतों का बदल जाना कोई बड़ी बात तो नहीं.
रूबरू मिलने का मौका मिलता नहीं है रोज,इसलिए लफ्ज़ों से तुमको छू लिया मैंने।
" फर्क ये है कि मैं आँखों में काजल नहीं लगाता,शायद इसलिए मैं आँखों से झूठ नहीं बोल पाता l"
जिनके लिए हम लिखते है ,अक्सर , उनको ही हम कुछ लिख नहीं पाते !!