मुट्ठी भर ख़्वाब मेरा,खुला पूरा आसमान तेरा lमैं चाँद तेरा हो सकता नहीं,तू बादल बन बरस सकता नहीं l
तबाही की तस्वीर साफ़ दिखने लगी
पानी तो पानी हवा भी बिकने लगी
उसी का शहर, वही मुद्दई, वही मुंसिफ
हमीं यकीन था, हमारा कुसूर निकलेगा
यकीन न आये तो एक बार पूछ कर देखो
जो हंस रहा है वोह ज़ख्मों से चूर निकलेगा
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……
Mujhe mere Kal ki Fikar Aaj bhi nahi hai..
Par Khuwahish tO tujhe Paane ki Qayamat tak rahegi..
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..