रोज़ मौसम की शरारत झेलता कब तक ,मैंने खुद में रच लिए कुछ ख़ुशनुमा मंज़र..!
ज़िन्दगी चाहे लिख रही हो काजल के गीत...!. . ख्वाब पलकों पे हमारी सुनहरे ही रहते हैं...!!
"मेरे बस में होता तो, एक पल भी तुमसे दूर ना होता,तुम्हारी बाहों में गुजरती रात, फिर कभी दिन ना होता l"
मैं अगर चाहु भी तो शायद ना लिख सकूं उन लफ़्ज़ों को
जिन्हे पढ़ कर तुम समझ सको की मुझे तुम से कितनी मोहब्बत है..!!
तुमसे ही रूठ कर तुम्ही को याद करते हैं
हमे तो ठीक से नाराज़ होना भी नही आता